अंबेडकरनगर। एमआरआई के लिए तीन महीने की वेटिंग, अल्ट्रासाउंड के लिए दस से पंद्रह दिन की वेटिंग और सीटी स्कैन जांच की रिपोर्ट लेने के लिए चार से पांच दिन की वेटिंग । मानो यहां इलाज न करके रेलवे का वेटिंग टिकट दिया जा रहा हो । जी हां यह हाल है महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग का, जहां अधिकांश जांच के लिए तारीख मिलती है ।
महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज अल्ट्रासाउंड,सीटी स्कैन और एमआरआई की जांच के लिए बड़ी संख्या में मरीज आते हैं । मरीज यह उम्मीद लेकर आते हैं कि यहां एक ही छत के नीचे आसानी से पूरा इलाज हो जाएगा । लेकिन पहुंचने पर पता चलता है कि उसे जांच के नाम पर तारीख मिल जाती है । ऐसे कम ही मरीज होंगे जिनका एक ही दिन में जांच हो जाए और उसे उसकी रिपोर्ट मिल जाए ।
मरीज मीरा देवी पत्नी जगदीश प्रसाद ने जून माह में डॉक्टर को दिखाया था । डॉक्टर ने उसे एमआरआई कराने की सलाह दी थी लेकिन उसे आठ अक्टूबर की तारीख दी गई है । एक अन्य मरीज राजेश कुमार के परिजन का कहना है कि गिरने से सर में चोट लग गई थी । मरीज मेडिकल कॉलेज में भर्ती है ,उसका एमआरआई होना है लेकिन कहां जा रहा है कि नवंबर में नंबर आयेगा ।

तीमारदार राजेश कुमार का कहना है कि उसके मरीज का अल्ट्रासाउंड होना है लेकिन जब वह वहां पहुंचा तो उसे दस दिन बाद का नंबर दे दिया गया । मजबूरन अब बाहर से जांच करानी पड़ेगी ।
एमआरआई के लिए लगभग तीन महीने का समय दे दिया जाता है । अल्ट्रासाउंड के लिए दस से पंद्रह दिन बाद बुलाया जाता है । ऐसा ही कुछ हाल सीटी स्कैन का है जहां जांच तो हो जाती है लेकिन उसका रिपोर्ट चार पांच दिन बाद ही मिलता है ।
तीन तीन रेडियोलॉजिस्ट,फिर भी बिगड़ी व्यवस्था
मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभाग में तीन तीन चिकित्सक हैं । जिसमे डॉ भगवान यादव और डॉ अमित राजन रेडियोलॉजिस्ट हैं ,जबकि डॉ के पी गुप्ता डिप्लोमाधारी रेडियो लॉजिस्ट हैं । बावजूद इसके अल्ट्रासाउंड जैसे जांच में देरी और सिटी स्कैन जांच के रिपोर्टिंग में देरी बढ़ा सवाल खड़ा करता है । कॉलेज के सूत्रों के मुताबिक डॉ भगवान यादव और डॉ केपी गुप्ता अल्ट्रासाउंड का जिम्मा संभालते हैं। डॉ अमित राजन सिटी स्कैन और एमआरआई का जिम्मा संभालते हैं । सूत्रों के मुताबिक ये डॉक्टर ज्यादा समय कॉलेज के बाहर ही रहते हैं । इसलिए जांच और रिपोर्टिंग में देरी होती है ।
तकनीशियनों की है कमी…
मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन और एमआरआई विभाग में तकनीशियनों की भारी कमी है । दोनों हो विभाग महज एक तकनीशियन बृजेश के सहारे चल रहा है । जानकारों के मुताबिक दोनों ही विभाग में कम से कम तीन तीन तकनीशन होना चाहिए ।
क्या कहते हैं जिम्मेदार…
मेडिकल कॉलेज के रेडियो लॉजी विभाग के प्रभारी और मीडिया प्रभारी डॉ विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ रही है लेकिन हमारे पास मैन पावर की कमी है । इसीलिए मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं जिसकी वजह से वेटिंग लिस्ट कम हुई है । सीटी स्कैन रिपोर्ट तीन चार दिन में दे दी जा रही है । और अल्ट्रासाउंड का वेटिंग भी कम हुआ है।




