अंबेडकरनगर । महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में लैब तकनीशियनों के स्थानांतरण का एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है । कुछ तकनीशियनों पर हाकिम की ऐसी कृपा बरसी है कि वे जिस विभाग में तैनात थे उनको ट्रांसफर कर फिर उसी विभाग में तैनाती दे दी गई । बताया जा रहा है कि लंबे समय से ब्लड बैंक और पैथोलॉजी में जमे चहेतों को वहीं बनाए रखने के खातिर इस तरीके से स्थानांतरण व्यवस्था अपनाई गई है । हालांकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि ये ट्रांसफर नहीं रि अरेंज है।
महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए फरवरी माह में एक साथ 34 तकनीशियनों का स्थानांतरण हुआ था । इनमें से अधिकांश को एक विभाग से दूसरे विभाग भेजा गया लेकिन कुछ तकनीशियन ऐसे हैं जिनका स्थानांतरण उसी विभाग से हटा कर उसी विभाग में कर दिया गया। बताया जा रहा है कि लंबे समय से एक ही विभाग में जमे तकनीशियनों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन के मद्देनजर ये बदलाव किया गया। लेकिन कॉलेज प्रशासन ने इसमें भी खेल कर दिया । दैनिक जागरण के पास जो स्थानांतरण सूची मौजूद है उसके मुताबिक कुल 34 तकनीशियन का स्थानांतरण हुआ था । इनमें से संतोष कुमार मिश्रा को रक्त कोष से हटा कर दोबारा रक्त कोष में ही तैनाती दे दी गई । संदीप कुमार को भी रक्त कोष से हटा कर रक्त कोष में नियुक्त कर दिया गया । अखिलेश कुमार को पैथोलॉजी से दोबारा पैथोलॉजी के तैनाती दे दी गई है। धर्मेंद्र कुमार यादव को माइक्रोबायोलॉजी से माइक्रोबायोलॉजी भेज दिया गया । अमरजीत वर्मा जो पहले से ही रक्त कोष में थे उनका भी ट्रांसफर दिखा कर रक्त कोष में ही कर दिया गया । रविन्द्र कुमार यादव को भी पैथोलॉजी से पैथोलॉजी में ट्रांसफर दिखा दिया गया । राकेश कुमार मिश्रा जो पहले से ही रक्त कोष में हैं उनका भी ट्रांसफर रक्त कोष में ही कर दिया गया। शोभाराम वर्मा को माइक्रोबायोलॉजी से हटा कर दोबारा माइक्रोबायोलॉजी में तैनाती दे दी गई है । पैथोलॉजी में तैनात आलोक वर्मा को भी दोबारा पैथोलॉजी में ही ट्रांसफर कर दिया गया है । माइक्रोबायोलॉजी में तैनात विनोद कुमार वर्मा को भी दोबारा उसी विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया । सूत्र बता रहे हैं कि अभी हाल में ही विनोद को ब्लड बैंक भेजा गया है । इस स्थानांतरण सूची की खास बात यह है कि पैथोलॉजी, माइक्रो बायोलॉजी और बल्ड बैंक के तकनीशियन पर ही मेहरबानी दिख रही है।
सवाल इस बात का है कि जब उसी विभाग से हटा कर उसी विभाग में तैनात करना था तो स्थानांतरण सूची बनाने की क्या आवश्यकता थी । लंबे समय से ब्लड बैंक और पैथोलॉजी में तैनात तकनीशियनों पर कॉलेज प्रशासन आखिर इतना मेहरबान क्यों है ?
इस मामले में जब मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ विवेक श्रीवास्तव से बात हुई तो उन्होंने यह स्वीकार किया कि सूची सही है। लेकिन उन्होंने कहा कि यह स्थानांतरण नहीं है । व्यवस्था को चलाने के लिए री अरेंज किया गया है ।




